Principal's Message
A message of learning, discipline, and opportunity.
प्रिय विद्यार्थियों,
‘‘ न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते’’ (इस संसार में दिव्य ज्ञान के समान मनुष्य को पवित्र करने वाला कुछ भी नहीं है) के आदर्श वाक्य के साथ जून 2018 में स्थापित शासकीय नवीन महाविद्यालय, कुई-कुकदूर के शैक्षणिक एवं शिक्षणेतर परिवेश में आपका स्वागत है। यह महाविद्यालय विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के साथ साथ उनमें कौशल अभिवृद्धि, सम्प्रेषण क्षमता का विकास, मानव निर्माण तथा मूल्यपरक शिक्षा प्रदान करने हेतु कृतसंकल्पित है। महाविद्यालय में उपलब्ध आधारभूत संसाधनों का समुचित एवं अनुकूलतम उपयोग करते हुए विद्यार्थियों को 21वीं सदी के भारत के समर्थ सशक्त एवं संयमित युवा के रूप में विकसित करते हुए ‘‘विकसित भारत 2047’’ की परिकल्पना को साकार करना मूल उद्देश्य है।
महाविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत स्नातक स्तर पर कला संकाय बी.ए., विज्ञान संकाय में बी.एस.सी. एवं वाणिज्य संकाय में बी.काम. के पाठ्यक्रम संचालित हैं। इन पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों को अपने संकाय से अलग संकाय के एक विषय को (जो महाविद्यालय में संचालित हैं) एवं महाविद्यालय में समय समय पर संचालित कौशल उन्नयन पाठ्यक्रम तथा मूल्य संवर्द्धन पाठ्यक्रम को चयन करने की स्वतंत्रता है। क्षमता उन्नयन पाठ्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थी हिन्दी, अंग्रेजी एवं पर्यावरण अध्ययन के विषयों का ज्ञानार्जन कर सकेंगे।
स्नातकोत्तर स्तर पर महाविद्यालय में विज्ञान संकाय के अंतर्गत रसायनशास्त्र तथा कला संकाय के अंतर्गत राजनीति विज्ञान, भूगोल, समाजशास्त्र एवं हिन्दी के पाठ्यक्रमों का अध्यापन कार्य संपादित किया जाता है।
महाविद्यालय में विभिन्न विषयों के परिषदों के माध्यम से विद्यार्थियों के ज्ञानार्जन के साथ उनके व्यक्तित्व के विकास की ओर ध्यान दिया जाता है। विद्यार्थियों को टेक्नोलॉजी में दक्ष बनाने हेतु कम्प्यूटर लैब के माध्यम से लघु पाठ्यक्रम भी संचालित किए जाते हैं जो पूर्णतः निःशुल्क हैं। शारीरिक विकास हेतु योग एवं व्यायामशाला के साथ बैडमिंटन कोर्ट, कैरम स्पेस, शुद्ध पेयजल, गर्ल्स कॉमन रूम, साफ सुथरा प्रसाधन कक्ष, व्यवस्थित प्रयोगशाला, व्यवस्थित ग्रंथालय, विभिन्न विषयों के परिषद, इंग्लिश क्लिनिक, इंग्लिश स्पीकिंग क्लब, विद्यार्थियों के क्षमता उन्नयन हेतु विद्यार्थी विकास कार्यक्रम इत्यादि की सुविधा भी उपलब्ध है।
महाविद्यालय के प्रांगण में भारतीय ज्ञान परंपरा को मूर्तरूप देने के उद्देश्य से ‘‘गुरुकुल’’ की परंपरा को साकार करते हुए ‘‘सरस्वती मुक्ताकाश मंच’’ की स्थापना की गई है जहाँ विद्यार्थी अन्यान्य विषयों पर शिक्षकों से चर्चा कर सकते हैं। यह खुला मंच महाविद्यालय के प्रांगण में पेड़ों के छांव तले निर्मित है जो पर्यावरण के प्रति प्रेम एवं जिम्मेदारी को भी संप्रेषित करता है।
मुझे आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि शासकीय नवीन महाविद्यालय कुई-कुकदूर में प्रवेश लेकर आप उत्तम जीवन मूल्यों को आत्मसात करते हुए सामाजिक समरसता, राष्ट्र निर्माण की भावना के साथ विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में अपना अमूल्य योगदान देंगे।
महाविद्यालय में संचालित पाठ्यक्रम, अनुभवी शिक्षकों का साथ, आयोजित किए जाने वाले समस्त शैक्षणिक एवं शिक्षणेतर कार्यक्रमों के माध्यम से आप एक सफल नागरिक बनकर समाज के, छत्तीसगढ़ के एवं भारत के यशस्वी विकास के साथी बनेंगे, यही आपसे अपेक्षा है।
इन्हीं भावनाओं के साथ आपका अध्ययनकाल आपके जीवन का स्वर्णिमकाल बने।
शुभकामनाओं सहित.....
प्रो. (डॉ.) जी.ए.घनश्याम
प्राचार्य